





मनोज़ चन्द्रन , सी वी ओ , कोचिन पोर्ट ट्रस्ट द्वारा संकलित
1. सरकार की ओर से बहुत कदमों के बावजूद भारत में भ्रष्टाचार दृढ रहता है और फलता - फ़ूलता है । सार्वजनिक धन का अपहार , कपटपूर्ण सार्वजनिक उपलब्धी , बाध्यकरण में और नियंत्रणात्मक संस्थानों में भ्रष्टाचार ये सभी हमारे सार्वजनिक जीवन की विपत्ति है । कई अध्ययनों से पता चला है कि भ्रष्टाचार केवल उन्नति के लिए दबाव मात्र नहीं है बल्कि असमानता बनाई रखती है, गरीबी बढाती है, मनुष्य पीड़ित बनते हैं, आतंकवाद और आयोजित अपराध के विरुद्ध लड़ाई फीका पड़ती है और राष्ट्र की छवि मलिन बनती है ।
2. पिछले छ दशकों में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं । भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने के लिए कारीगर किए गए संस्थापनाएं या विधि-निर्माण का अभाव नहीं है भारत का प्रश्न । सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी सन्निहित रहने के लिए यह मुख्य है कि भारत एक दण्डात्मक रीति से एक नियंत्रणात्मक एवं सहयोगी रीति पर आ जाए हैं । भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ना कुछ भ्रष्टाचार विरुद्ध एजंसियों का काम महसूस होता है । जबकि वास्तव में यह हर एक नागरिक तथा प्रतिष्ठान का उत्तरदायित्व है । हमारे समूह में भ्रष्टाचार का मोर्चाबंदी देने पर भ्रष्टाचार के विरुद्ध किसी भी कौशल विजयी होने केलिए समूह के सभी कोने से अविच्छिन्न अर्पण अनिवार्य होगा जैसे कि राष्ट्रीय नेता सरकारी एजंसियों, सिविल सोसाइटी, मीडिया,निजी सेक्टर और आम जनता इसमें शामिल होगा । सभी पणधारियों के बीच सहयोग की वृद्धि की जाए कि भ्रष्टाचार विषय पकड़कर रिपोर्ट करके उचित रूप से मुकद्दमा चलाना सुनिश्चित कियाए ।
3. सूचना का अधिकार अधिनियम ,2005 ( आर टी आई अधिनियम) भ्रष्टाचार नियंत्रण और निरोध के लिए मुख्य पहल है । भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक उपकरण के रूप में आर टी आई अधिनियम अधिक प्रभावी होने के लिए सूचना के प्रकटीकरण से छूटों का गुंजाइश आर टी आई के अंतर्गत कम करना है । एक भ्रष्टाचार विरुद्ध परिप्रेक्ष्य में निम्न कदम उठाना है ।
o सक्रिय प्रकटीकरण अधिक रूप से होना चाहिए ।
o सार्वजनिक शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन होना चाहिए ।
o स्कूल तथा कालेज पाठ्यक्रम में आर टी आई सिलबस जोड देना चाहिए ।
4. भ्रष्ट तथा अनैतिक व्यवहार नियंत्रित करने के लिए कृत्रिम आचरण संहिता , विधि और विनियमों की अपेक्षा एक शिक्षित नागरिक या वर्ग ही शायद अधिक निर्णायक लगता है । भ्रष्टाचार विरुद्ध विधि तथा संस्थापनाएं केवल सिद्धांतवाले लोग ग्रहण करने पर या गैर-अनुपालन रिपोर्ट करने पर ही अच्छा लगता है । नागरिक चार्टर ऐसा एक उपकरण है जिससे जानकारी उपलब्ध है और नागरिक शक्ति बढ़ती है बशर्ते कि चार्टर व्यापक सार्वजनिक एवं आंतरिक परामर्श के आधार पर हो, न्यूनतम सेवा मानक और शिकायत प्रक्रिया शुद्ध रूप से निर्धारित हो और व्यापक रूप से प्रसार किया हो । यह ऑनलाइन में भी उपलब्ध कराना चाहिए ।
5. सुतार्यता एवं जबावदारी सुनिश्चित करने के एक उपकरण के रूप में शिक्षा या स्वास्थ्य क्षेत्र के समान सभी सार्वजनिक उपयोगिताओं के लिए सामूहिक लेखा परीक्षा अनिवार्य बनाना चाहिए । सिविल, सोसाइटी प्रतिष्ठानों और एन जी ओ लोगों को प्रबल बनाए जो कि वे सामूहिक लेखा परीक्षा प्रभावी रूप से करने के लिए
प्रबल बन जाए । भ्रष्टाचार विरुद्ध विषयों सामूहिक लेखा परीक्षा आयोजित करने के अच्छे प्रयोग और रीतियों और सामूहिक लेखा परीक्षा के आयोजन में उन्हीं से प्रतीक्षित सहयोग पर राज्य स्तर के संस्थापनाओं द्वारा प्रशिक्षण दिया जा सकता ।6. सरकार के बीच में सहयोगी काम की भी आवश्यकता है जिसकेलिए वीशेषज्ञता एवं स्रोत है और लोगों के बीच मेलमिलाप होनेवाले सिविल सोसाइटी प्रतिष्ठानों भी है । लोगों के बीच में शासन तथा भ्रष्टाचार सम्बद्ध विषयों पर बोध उत्पन्न करके भ्रष्ट प्राधिकारियों के विरुद्ध उपाय लेने के लिए शासन तथा भ्रष्टाचार संबद्ध विषयों पर काम करनेवाले सिविल सोसाइटी प्रतिष्ठानों द्वारा सी वी सी आदि के साथ निकट रूप से काम करना चाहिए । भ्रष्टाचार के विरुद्ध सार्वजनिक बोध उत्पन्न करना , भ्रष्टाचार विरुद्ध संस्थापनाओं से मिलते रहने का अधिकार संबंधी शिक्षा सार्वजनिक को देना और इससे संबंधित प्रक्रियाओं के लिए जानकारी उपलब्ध करने के लिए सी वी सी के अंदर एक समाज संपर्क स्कंध की प्रासंगिकता है ।
7. औद्योगिक असोसियेशन , चेम्बर , निकाय आदि निर्धारीत समय परिधि पर काम करना चाहिए जो कि सहयोगी शासन का मानक और विभिन्न पणधारियों के बीच का विश्वास का स्तर बढ़ सकें । निजी क्षेत्र से संबंधित भ्रष्टाचार विरुद्ध कार्यसूची निम्न प्रकार होना चाहिए ।
o भ्रष्टाचार विरुद्ध कानूनों के परिवेश में निजी क्षेत्र ;
o छोटे तथा मध्यम आकार के प्रतिष्ठानों की चुनौतियों का सामना करना;
o छोटे भुगतानों में वाणिज्यिक रिश्वतख़ोरी का उपचार ।
8. भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने में समाज की कानूनी संरचना एक मुख्य स्तंभ है । भारत में भ्रष्टाचार का निरोध एवं नियंत्रण के लिए कानूनी ढांचा प्राथमिक रूप से कानूनी तथा साधारण विधि के आधार पर है । एक विधान और विसिल ब्लोवरों और साक्षियों के संरक्षण संबंधी पर्याप्त प्रक्रिया के अभाव में बदले के भय से या अनाम या कृतनामक शिकायतें नहीं उत्पन्न होती है जो उपेक्षा की जाती है या कोई जांच-पड़ताल केलिए नहीं लिया जाता है । एक निजी व्यक्ति घूसख़ोरी या भ्रष्टाचार प्रयोग में पड़ने पर उसे मना करने के लिए पी सी अधिनियमा में कोई सीधा प्रावधान नहीं है ।
9. सी बी आई एवं राज्य ए सी बी के बीच में कोई औपचारिक सहयोगी प्रक्रिया नहीं है । एक लगातार रूप से कर्मचारियों की परिसंपत्तियों पर जानकारी सहित सभी जानकारियां मिलाकर इसके बारे में नियंत्रकों /एजंसियों से सामयिक आधार पर शेयर करने के लिए कोई सक्रिय प्रक्रिया नहीं है । किसी भी अस्तित्व द्वारा भ्रष्टाचार प्रयोग की रीति पर किसी जानकारी शेयर करने केलिए उचित षड्यंत्र होना चाहिए जिसमें बहु नियंत्रकों जैसे बीमा या बैकिंग कंपनी या परस्पर निधि या अधिकार या टेलिकोम कंपनी के अंतर्गत आनेवाले अस्तित्वों पर गोपनीय टिप्पणी संबंधी बुद्धिमत्त जानकारी शामिल है ।
10. भारत में सार्वजनिक उपलब्धि सामान्य वित्तीय नियमों द्वारा मार्गदर्शित है । इस क्षेत्र में विधान के लिए एक प्रबल मामला है जिसमें भौगोलिक रूप से स्वीकृत रीतियों जैसे वर्जन , अपील और पुनरीक्षा , परिकर का अवार्ड आदि समायोजित है । उपलब्धि में ईमानदारी समझौता सरकार की सहायता के लिए और व्यापारों तथा सिविल सोसाइटी को सार्वजनिक ठेके में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने में एक नव परिवर्तन लाने की प्रक्रिया है । अच्छे सामूहिक शासन उपायों पर निजी क्षेत्र को सहयोग देकर और उन्हें एक ईमानदारी समझौता के लिए वचनबद्ध करके वे अपने व्यवहारों में उचित लाभ नहीं लेंगे विशेषतया सरकार के साथ यह एक अनिवार्यता है । इसमें एक सार्वजनिक क्षेत्र ठेके के लिए उपलब्धि एजंसी और सभी बिडरों के बीच में भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक करार भी शामिल है । ईमानदारी समझौता हमारे राष्ट्र के लिए निम्न कारणों से अतिरिक्त रूप से सुसंगत है ।
oभ्रष्टाचार बोध सूचक में निम्न मूल्य निर्धारण
o सार्वजनिक उपलब्धियों में कलंक और देरी का इतिहास
o भ्रष्टाचार की लड़ाई में वर्तमान भ्रष्टाचार विरुद्ध नियंत्रणों का सीमित विजय ।
11. सिविक्स जैसे स्कूल विषयों में भ्रष्टाचार विरुद्ध शिक्षा जोड़ना चाहिए । पाठ्यक्रम में नैतिक विषयों के लिए स्थान देना है और सार्वजनिक अच्छाई तथा सामाजिक न्याय जैसी धारणाएं भी उपलब्ध करना है जो भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई की अनिवार्यता पर ज़ोर देता है । सार्वजनिक प्रशासनिक , व्यापार , विधि और अर्थशास्त्र स्कूलों से तकनीकी और इंजीनियरिंग व्यवसायों तक पाठ्यक्रम में भ्रष्टाचार विरुद्ध शिक्षा जोड़ना चाहिए । यह अनिवार्य है कि भ्रष्टाचार विरुद्ध शिक्षा विभिन्न पहलुओं पर हृदयंगम करना है । भ्रष्टाचार विरुद्ध लड़ाई में व्यक्तिगत ईमानदारी के लिए कोई एवजी नहीं है और नागरिकों के लिए अपने जीवन के विभिन्न स्तरों पर इस प्रकार की ईमानदारी मन में पैदा करनी चाहिए ।
12. भ्रष्टाचार बने रखना देखने पर समूह का किसी भी व्यक्ति अपने कर्तव्य के रूप में तुरंत ही रिपोर्ट करने से ही भ्रष्टाचार विरुद्ध कौशल विजयप्रद हो सकता है । नागरिकों का शब्द और उत्तरदायित्व से वे स्वयं स्वतंत्र रखवाले कुत्ते बन सकते हैं ।
सी वी सी की सतर्कता दृष्टि पारियोजना
भ्रष्टाचार रिपोर्ट करने के लिए नागरिक सशक्तीकरण
9 दिसंबर 2010 को विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरुद्ध दिन मनाते समय सी वी सी ने भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतें प्रकटीकरण दाखिल करने केलिए एक सीवीसी के साथ नागरिकों के लिए एक अंतरापृष्ट उपलब्ध करने के उद्देश्य से सतर्कता दृष्टि परियोजना प्रारंभ किया । यह एक प्लाटफार्म है जिसकी ओर घूसखोरी एवं भ्रष्टाचार संबंधी सूचना, साधारण लोगों से जिसमें विसिल ब्लोवरों और सरकारी एजन्सियां शामिल है, सीवीसी को मिलती है जिससे भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़नेवाले राष्ट्र की छवी बढ़ती है । एक सतर्कता दृष्टि से भ्रष्टाचार के विरुद्ध बने रखने के लिए नागरिकों को प्रोत्साहन देता है ।
सतर्कता दृष्टिवाले कौन है
सतर्कता दृष्टि वह व्यक्ति है जो सार्वजनिक झुकाव नागरिक हो, एक स्वयंसेवक हो और सी वी सी को भ्रष्टाचार संबंधी रिपोर्ट देकर इसके विरुद्ध लड़कर सहायता प्रदान करनेवाला हो । सतर्कता दृष्टि स्वयंसेवकों द्वारा शिकायतें और भ्रष्टाचार संबंधी शिकायत सहायक दस्तावेजों के साथ सी वी सी को फाइल करने के पहले वह पंजीकृत करना है ।
सतर्कता दृष्टि के रूप में पंजीकरण कैसा है
वेब या मोबाइल द्वारा पंजीकरण करके एक सतर्क नागरिक एक सतर्कता दृष्टिवाला बन सकता है । वेब द्वारा पंजीकरण करने के लिए कृपया सी वी सी वेबसाइट(www.cvc.nic.in or www.cvc.gov.in or www.vigeye.in ) का संदर्शन करें और सतर्कता दृष्टि का संबद्ध लिंक क्लिक करें और ऑनलाइन पंजीकरण फार्म पूरा करें जैसे नाम,ई-मेल,फोन नं आदि ब्यौरा उपलब्ध करके मोबाइल पंजीकरण के लिए मोबाइल फोन द्वारा 09223174440 की ओर एक खाली एस एम एस या सतर्कता दृष्टि भेजा दिया जा सकता और पंजीकरण लिंक मिलाकर एक एस एम एस प्राप्त किया जाएगा ।
सतर्कता दृष्टि की विशिष्टताएं क्या क्या है
सतर्कता दृष्टि द्वारा विश्वास के साथ शिकायतों का वास्तविक -समय पर प्रस्तुतीकरण किया जा सकता है । मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य या व्याख्यायें मोबाइल मीडिया द्वारा रिकार्ड की जा सकती है और फोटो, ऑडियो रिकार्ड , वीडियो रिकार्ड, नोट आदि संलग्न किया जा सकता है । शिकायतों के साथ सहायक मीडिया /डाटा मोबाइल /जीपीआर ईएसए या वी-फी नेट वर्क द्वारा अ पलोड किया जा सकता है और आगे सीवीसी द्वारा ऐसी शिकायतों पर उचित कार्रवाई ली जाएगी ।
अधिक विवरण के लिए www.vigeye.in का संदर्शन करें ।
1. भारत सरकार ने केन्द्रीय सतर्कता आयोग ( सीवीसी या कमीशन ) को एक नियुक्त एजन्सी के रूप में सार्वजनिक हित प्रकटीकरण एवं सूचक के संरक्षण संबंधी संकल्प के अंतर्गत भ्रष्टाचार का आरोप या कार्यालय दुरुपयोग पर लिखित शिकायतें स्वीकार करके उचित कार्रवाई की सिफ़ारिश देने के लिए प्राधिकृत किया ।
2. केंद्रीय सरकार या किसी केन्द्रीय अधिनियम के अधीन संस्थापित किसी निगम, सरकारी कंपनियां, समितियां या केंद्रीय सरकार द्वारा स्वायत्त या नियंत्रित स्थानीय प्राधिकरणों के किसी कर्मचारी द्वारा किसी भ्रष्टाचार का आरोप या कार्यालय का दुरुपयोग प्रकटीकरण या लिखित शिकायत एक नियुक्त एजंसी सीवीसी द्वारा स्वीकार किया जाएगा । राज्य सरकार द्वारा कार्यरत कार्मिक और राज्य सरकार या इसके निगमों के कार्यकलापें सीवीसी की सीमा के अधीन नहीं आएंगे ।
3. ऐसी शिकायतें स्वीकार करते समय सी वी सी को परिवादी रहस्य का अभिज्ञान सुरक्षित रखने का उत्तरदायित्व है । इसलिए सार्वजनिक को यह सूचना दी जाती है कि किसी भी शिकायत जो इस संकल्प के अधीन बनाई जाती है निम्न पहलुओं से अनुपालित होना चाहिए ।
i) शिकायत एक बंध/सुरक्षित लिफाफे में होना चाहिए ।
ii) लिफाफे में सचिव , केन्द्रीय सतर्कता आयोग की पता लिखना चाहिए और " सार्वजनिक हित प्रकटीकरण के अंतर्गत शिकायत '' ऊपर लिखना चाहिए । लिफाफा ऊपर लिखित और बंध नहीं होने पर ऊपरी संकल्प के अधीन परिवादी को सुरक्षित रखना आयोग को संभाव्य नहीं होगा और शिकायत पर सीवीसी के साधारण शिकायत पॉलिसी के आधार पर विचार किया जाएगा । परिवादी द्वारा अपना नाम और पता शिकायत के प्रारंभ में या अंत में या एक संलग्न पत्र में देना चाहिए ।
iii) आयोग द्वारा अनामक या कृतकनाम शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जाएगा ।
iv) शिकायत का सारांश ध्यान से ड्राफ्ट करना चाहिए जो कि उसका /उसकी अभिज्ञान का कोई संकेत या विवरण नहीं मिलें । तथापि शिकायत का विवरण स्पष्ट और प्रमाणनीय होना चाहिए ।
v) परीवादी का अभिज्ञान सुरक्षित रखने के लिए सी वी सी द्वारा कोई पावती नहीं भेजेगा और विसिल ब्लोवेर्स से अपने हितानुसार सीवीसी के साथ आगे कोई पत्राचार में प्रवेश न करने के लिए सलाह भी दी जाती है । आयोग ने सतर्कता दी की प्रमाणनीय तथ्यों के आधार पर उपर्युक्त सूचित भारत सरकार के संकल्प के अंतर्गत उपलब्ध प्रकार अनिवार्य कार्य किया जाएगा । आगे कोई स्पष्टीकरण अपेक्षित है तो आयोग द्वारा परिवादी से मिलते रहेगा ।
4. स्वयं द्वारा शिकायत की ब्यौरा सार्वजनिक को न देने पर या किसी भी कार्यालय या प्राधिकरण को अपना अभिज्ञान न देने पर परिवादी का अभिज्ञान नहीं प्रकट किया जाएगा ।
आगे रिपोर्ट /जांच -पडताल के लिए बुलाने पर सूचक का अभिज्ञान सी वी सी द्वारा प्रकट नहीं किया जाएगा और उक्त प्रतिष्ठान के मुख्य से सूचक का अभिज्ञान गुप्त रखने का अनुरोध किया जाएगा जो कि किसी भी कारण से उसका अभिज्ञान संबंधी जानकारी मुख्य को मिलें ।
आयोग के निदेशों के विरुद्ध अगर सूचक का अभिज्ञान प्रकट किया जाता है तो वर्तमान विनियम के अनुसार ऐसा करनेवाले व्यक्ति या एजंसी के विरुद्ध सभी हद तक उचित कार्रवाई शुरू करने के लिए प्राधिकृत किया जाता है ।
5. किसी भी व्यक्ति को यही कारण से जो कि उन्होंने एक शिकायत या प्रकटीकरण फाइल किया है कि इन्हीं कारणों से उन्हें दण्डित किया है तो इस विषय पर सामंजस्य के लिए वह एक आवेदन सी वी सी के समक्ष फाइल किया जाए जब कि आयोग द्वारा उचित निदेश उक्त व्यक्ति या प्राधिकरण को दिया जाए ।
6. यदि आयोग की राय यह हैं कि परिवादी या साक्षियों के लिए सुरक्षा अनिवार्य है, यह उक्त सरकारी प्राधिकरणों केलिए उचित निर्देश जारी किया जाएगा । सी बी आई या पुलीस अधिकारियों को बुलाने के लिए आयोग को प्राधिकृत किया जाएगा; अनिवार्य होने पर स्वीकृत शिकायत की सीमा तक जांच - पड़ताल पूर्ण करने के लिए सभी सहायता दी जाएगी ।
7. यदि आयोग यह महसूस किया जाता है कि शिकायत अभिप्रेरित या दुखदायी हो उचित कदम उठाने का स्वातंत्र्य होगा ।
8. इस संक्ल्प के अधीन आयोग द्वारा भेज दी गई शिकायत के संबंध में सी वी ओ द्वारा निम्न लिखित कार्रवाई लेना अनिवार्य है ।
9. सरकारी कर्मचारी जांच अधिनियम, 1850 के अंतर्गत आदेश दिए गए एक औपचारिक और सार्वजनिक के संबंध में या जांच अधिनियम, 1952 की आयोग के अंतर्गत जांच के लिए दिए गए विषय पर किसी प्रकटीकरण में आयोग द्वारा विचार नहीं किया जाएगा ।
सीवीसी के वेब साइट http://www.cvc.nic.inमें विस्तृत अधिसूचना की प्रतिलिपि मिलेगी ।
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कोचिन पोर्ट ट्रस्ट के सतर्कता कार्यालय में शिकायत का प्रबन्धन
सतर्कता कार्यकलाप
प्रचालनों के सभी क्षेत्रों में भ्रष्टाचार के प्रति विरोध करने में कोचिन पोर्ट ट्रस्ट वचनबद्ध है । असली पारदर्शी एवं उत्तम संगठनात्मक संस्कृति संबंधी जानकारी, सिस्टम में सुधार एवं निवारण उपाय के जरिए संभालने के लिए पोर्ट ट्रस्ट के सतर्कता शाखा एक मुख्य सतर्कता अधिकारी ( सी वी ओ )श्री॰ मनोज चन्द्रन, ( आईटीएस-91), के अधीन कार्यरत है, वे पोर्ट ट्रस्ट के वर्तमान सी वी ओ है ।
सतर्कता स्कन्ध कार्यकलाप में शामिल है ,
| शिकायतों का प्रबन्ध करना । |
| प्रमाणनीय आरोपों का अन्वेषण ।. |
| भ्रष्टाचार रीतियों संबंधी समाचार का संग्रहण ।. |
| अनुशासनिक विषयों पर उपदेश केलिए सीवीओ को उल्लिखित करना आदि ।. |
पोर्ट उपभोक्ता एवं आम जनता यह जान लिया जाय कि यदि पोर्ट ट्रस्ट के भ्रष्टाचार संबंधी कोई सूचना आपके पास उपलब्ध है या आप भ्रष्टाचार के पात्र है , शिकायत अध्यक्ष कोचिन पोर्ट ट्रस्ट या सीवीओ कोचिन पोर्ट ट्रस्ट या केन्द्रीय सतर्कता कमीशन, नई दिल्ली को प्रस्तुत करने के लिए आपका स्वागत है ।
संपर्क विवरण :
| श्री पोल आन्टणी आई ए एस, |
|---|
| अध्यक्ष, |
| कोचिन पोर्ट ट्रस्ट, |
| कोचिन -682 009. |
| दूरभाष : 0484 2668200 /2668566 (का) 2668163 (फाक्स) |
| ईमेल : chairman@cochinport.gov.in |
| श्री मनोज चन्द्रन, |
|---|
| मुख्य सतर्कता अधिकारी, |
| कोचिन पोर्ट ट्रस्ट, |
| कोचिन -682 009. |
| दूरभाष : 0484 2668041 (का), 9847133555 (मोबाइल) |
| ईमेल : cvo@cochinport.gov.in |
| सचिव, |
|---|
| केंद्रीय सतर्कता आयुक्त, |
| सतर्कता भवन, |
| जीपीओ कांप्लक्स,ब्लॉक ए, आई एन ए, |
| नई दिल्ली - 110 023. |
| पुलीस अधीक्षक, |
|---|
सी बी आई ( ए सी बी ), |
कतृकडवु, कोचिन-17 |
दूरभाष: 0484 2348501 |